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सिवान बिहार के एक छोटे से गाँव पंजवार में हुए भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन-9, आखर के मंच पर गुरुजी के हाथों ये सम्मान पाना वाकई मेरे लिए बड़ी बात थी गुरुजी घनश्याम शुक्ल गाँव के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए सच में महात्मा आदमी हैं समाज के लिए उनका नि:स्वार्थ तन मन धन से समर्पण की भावना हम नयी पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी सीख देती है ! ऐसे महान व्यक्ति के हाथों सम्मान पाना मेरे लिए गर्व की बात है! मैं धन्यवाद करता हूँ आखर परिवार के सभी लोगों का खास कर मुन्ना कुमार पांडेय, संजय सिंह, नबीन चंद्रकला कुमार जी और भी बहुत सारे नाम है जो लिखूं तो शायद कम पड़ जाए, आप सभी का इतना प्यार और सम्मान मिला उसके लिए दिल से आभार !
आखर जो भोजपुरी साहित्य, संस्कृति, संस्कार व स्वाभिमान की रक्षा के लिए तात्पर्य एवं भोजपुरी में हो रहे अश्लीलता के खिलाफ एकजूट हो कर आवाज उठाने वाली मजबूत इकाई बन चुकी हैं इस संगठन से जुड़ कर बहुत खुशी हुई !
दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में जब पहली बार मैंने आम दर्शकों के लिए अपना लौंडा डांस प्रस्तुत किया तब आखर के बहुत से लोगों से मिलने का मौका मिला मुझे याद है की उस तमाम भीड़ के आधे से ज्यादा दर्शक सिर्फ आखर परिवार से थे जो इस खुशी में आये थे कि बिहार की लगभग विलुप्त होती कला लौंडा नाच NSD में एक छात्र प्रस्तुत कर रहा है! जब तक मैं मंच पर से अपनी प्रस्तुति दे कर उतर नहीं गया तब तक दर्शकों की आवाज और तालियाँ बजती रही! लोगों का यह रिस्पॉन्स देख कर दिल खुशी से झूम गया था उनमे कई दर्शक ऐसे थे जिन्होंने पहली बार इस कला के बारे में जाना और कई दर्शक तो ऐसे भी मिले जिनका लौंडा नाच के प्रति जो पहले से एक गलत धारणा बन बैठी थी वो उस दिन से टूट गयी!
जब आखर से निमंत्रण मिला तो मुझे बहुत खुशी हुई और मैंने खुशी-खुशी यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया!
साफ-सुथरा भोजपुरी साहित्य, संस्कृति, संस्कार एवं स्वाभिमान की रक्षा के लिए नि:स्वार्थ आप सब की मेहनत और लगन देख कर आत्मविश्वास दो गुना हो जाता है !
ऐसे ही ये आयोजन निरंतर बढ़ता रहे! आयोजन की सफलता और आगे के लिए आखर परिवार के सभी लोगों को मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएं और बधाई!
धन्यवाद
🙏 जय भोजपुरी🙏