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ध्रुव हर्ष द्वारा लिखी गई यह कविता..

Photo By: New Love Times

आज तो
आख़िरी रात है,
मैं जागूँगा…
उनके लिए
जिन्होंने मुझे कभी नहीं अपनाया।
वे
जिन्हें मैं चूमना चाहता था
उन मीराओं और मेहरून्निसाओं के लिए
जो मेरे लिए कविताएँ लिखतीं थी
और कमर में हाथ डालकर
सैर करना चाहती थी
उन सारे लोगों के लिए भी
जो कैंटीन पर
बस चाय पीना चाहती थी
और उनके लिए भी
एक पल और
जो अपने आपको बदसूरत समझती
और मेरे साथ वक़्त बिताना चाहती थी
मैं जागना चाहता हूँ…!