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श्वेत कपोत कबतक हम आसमाँ में उड़ाएंगे
कबतक शहीदों के शव पर आँसू हम बहाएंगे

कह दो उनसे जो नफरत से जंग जितना चाहते हैं
जब-जब नफरत लड़ी हमसे तब-तब मुँह की खाई है

गौतम, नानक के वंशज हैं हम शाँति के संदेशवाहक हैं
ये मत सोचो हम निर्बल भारतमाता के बालक हैं

तीन-तीन युद्ध तुम हमसे हारे फिर भी गाल बजाते हो
हमारे जवानों को शहीद कर हमें मुँह चिढ़ाते हो

तुमको क्या दें दोष भला जब खोंट अपने ही घर में है
सेना को पत्थर मारने वाले हाथ अभी तक तेरे सर पे है

वीर शहीदों के शव पर हम आँसू नहीं बहाएंगे
हँसते-हँसते गम के आँसू हम यूँ हीं पी जाएँगे

नफरत थी जिनको अश्कों से उनकी खातिर जी लेंगे
कोई दे दे आज जहर तो हँसते-हँसते पी लेंगें

कहे कन्हैया सुनो ऐ मोदी अब हमने यह ठानी है
गद्दारों के घर में घुस के उनको धूल चटानी है

तुम गर साथ नहीं दोगे तो भी हम बाजी मारेंगे
पत्थरबाजों को कश्मीर में चुन-चुनकर मारेंगे

अब जी के हम क्या करेंगे, क्या रक्खा है जीने में
देखना है कि कितना दम है 56 इंची सीने में

Picture Credit-Infinite Knowledge