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इल्लाहबाद में कुछ तो बात ज़रूर है जो इस ‘इल्लाहबाद’इयात को इतनी करीबी सी चीज़ सा महसूस करवा देता है, जो इस शहर में लगे मेले को कुछ ज़्यादा ख़ास बना देता है.
क्योंकि सुबह के उगते सूरज को यूँ मैने पहले इतनी तसल्ली और तसव्वुर से कभी नहीं देखा होगा, मेरे उस ताम-झाम और भाग दौड़ भरे दिल्ली-मुंबई से शहर में.
“मन पावन हो गंगा में डूबे नहाए, मन रावण जो लहरों में तूने बहाए. जो चला गया वो लौट के फिर ना आए, तेरा कर्म ही है जो संग तेरे ही जाए.”
अर्ध कुंभ कहो, दिव्य कुंभ कहो, महा कुंभ कहो, या इसे भव्य कुंभ पुकार लो; भावनायें वही बँट रही हैं यहाँ – मन की तृप्ति, शांति.
हे गंगा मैया, आया हूँ मैं तेरे दर पर बन के सवली.
तो अब स्वीकार करो ये अरदास हमारी.
भरी सर्दी में अपने ऐश-आराम को कुछ दिनों के लिए त्याग कर, इतने सारे लोग थोड़ा सा कष्ट भोगने को क्यों तैयार हैं? कुछ तो ख़ासियत होगी न इस पर्व में? कुछ तो बात अलग होगी ही न.
ये लोग अपने अनोखे ढंग से, अपने देवता को पुकार रहे हैं. इबादत कर दिल का बोझ हल्का कर रहें हैं.
इनकी आस्था, इनका जुनून, और इनका विश्वास देख वो शाम भी कुछ शरमाई थी. कुछ गुलाबी सा रूप ले कर सूरज ने इनकी श्रद्धा को स्वीकार लेने का संकेत भी दिया था.
कुम्भ 2019 के पहले शाही स्नान की ओर कुछ यूँ बढ़े बड़े-बूढ़े और उनके रथ.
देख रहें हैं कितनी दूर-दूर से लोगों का जमावड़ा प्रयाग पहुँचा है?
ये क़तार देख पा रहें हैं आप? इच्छालुओं और श्रद्धालुओं की तादाद काफ़ी ज़्यादा है.
शाही स्नान की शाम – श्री दत्तावेय विजयतेतराम
इस भीड़ ने कई दफे सख्ती भी बर्ति, पर लोग “ओम नामो: नारायण” की धुन में मग्न, तृप्त रहे.
इनसे मिलिए. ये हैं हमारे अखाड़े के संचालक साहब. अपने कक्ष से ये सोचते हुए बाहर निकले हैं कि ज़रा देखा जाए बाहर काम काज भी चल रहा है या सिर्फ़ मौज मस्ती चालू है.
अब इनको देखिए. अपनी लट्टों को सवारे, भुजाओं में भस्म भरे कैमरे के सामने कितना इतरा रहें हैं: मानो भगवा चोला पहने अपने सामने आए बाबाजी को डाँट कर कह रहें हों, “साइड हो. मेरी फोटू उतारने दो”. वाह बाबाजी! इस उम्र में भी क्या जोश है.
“शंकारा, तेरे जाप के बििना चले ये साँस किस तरह. मेरा कर्म तू ही जाने क्या बुरा है क्या भला; तेरे रास्ते पे मैं तो आँख मूंद के चला. तेरे नाम की ज्योत ने सारा हर लिया तमस मेरा. “
सीपियों की ओंट में मोतियाँ हों जिस तरह, जादू बसा है इस शहर और इसके मेले में कुछ उसी तरह.