जनता- जनार्दन

#Theme of the week #जनता- जनार्दन

वीर शहीद

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श्वेत कपोत कबतक हम आसमाँ में उड़ाएंगे कबतक शहीदों के शव पर आँसू हम बहाएंगे कह दो उनसे जो नफरत से जंग जितना चाहते हैं जब-जब नफरत लड़ी हमसे तब-तब मुँह की खाई है गौतम, नानक के वंशज हैं हम […]

#Theme of the week #जनता- जनार्दन

शहीद की बहन

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शायद कोई कमी रह गई मेरे राखी के धागों में तभी मेरे भैया की यादें धू-धू जल गई अंगारों में वादा कर के गए थे आऊँगा डोली में तुझे बिठाने कैसे पिया के संग जाऊँ सात फेरों के वचन निभाने […]

#जनता- जनार्दन

सुसाइड

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प्रिय शताब्दी होस्टल के सथियों मुझे यह देख कर अत्यंत हर्ष होता हैं कि, विश्वविद्यालय में पाठ्येत्तर गतिविधियों का आयोजन हो रहा है। मैं कौतुक वश आपका पोस्टर देख कर रुक गयी। उदबोधन ‘the अवेकनिंग’ ये है आपके कार्यक्रम का […]

#जनता- जनार्दन

मैं जागूँगा…

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ध्रुव हर्ष द्वारा लिखी गई यह कविता.. आज तो आख़िरी रात है, मैं जागूँगा…उनके लिएजिन्होंने मुझे कभी नहीं अपनाया। वे जिन्हें मैं चूमना चाहता था उन मीराओं और मेहरून्निसाओं के लिए जो मेरे लिए कविताएँ लिखतीं थी और कमर में […]

#Uncategorized #जनता- जनार्दन

पंजवार का अनुभव

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सिवान बिहार के एक छोटे से गाँव पंजवार में हुए भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन-9, आखर के मंच पर गुरुजी के हाथों ये सम्मान पाना वाकई मेरे लिए बड़ी बात थी गुरुजी घनश्याम शुक्ल गाँव के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज […]

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बलात्कार

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यह समय बलात्कार का है बलात्कर स्त्रियों से कमज़ोरों से बच्चों से बच्चों के दिमाग़ों से इतिहास से कानून से और धर्म से होता जा रहा है। कुछ चुप हैं कुछ लिख पढ़ रहे हैं कुछ अट्टहास कर रहे हैं […]

#जनता- जनार्दन

बच्चन जी को समर्पित

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‘बच्चन’ जी की मधुशाला मे खूब पिया मैनें हाला, अचरज मे पड़ गई देखकर  मुझको वह साकी बाला, मैंने बोला मुझे न रोको पी लेने दो आज हमें बरसों से मैं ढूढ़ रहा था  आज मिली है ‘मधुशाला’ || प्याला […]

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कुकुर- एक कविता

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जब हम कतहुँ जाईं,उहाँ बइठल कुकुर पाई। उ काटे चाहे हमके, हम उहवाँ से हट जाईं।। नाही निकलत बानी डरे, मन भइल बा मरे-मरे। कहवां कतना हम गिनाई, टोला-महाला घरे-घरे।। झांक के देखी कबहुँ त, उ फरके से गुराइल। दांत […]

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कायर?

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वह मेरा ताऊ है वह मेरा चाचा, मामा, पिता कुछ भी हो सकता है। वह आकर मुस्कुराता था वह मुझे बुरी तरह से चूमता था उसके होंठ मेरे नाज़ुक होंठों और गालों में चुभते थे। वह मेरे नन्हें हाथों को […]

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तुम मेरी दुनिया की सबसे खूबसूरत कड़ी हो

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मैं कई बार देखता हूँ तुमको एकटक देखती हुई आसमान की ओर घिरते हुए काले बादल को देख तुम घबराती नही मुस्कुरा देती हो अचानक से एक बूंद तुमको छू जाती है तुम छुप जाती हो दौड़ कर एक अधूरे […]

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